1.11 लाख करोड़ का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

1.11 लाख करोड़ का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट को उत्तराखंड के भविष्य का सशक्त मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला दृष्टिपत्र है। लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में विकास, विरासत, संस्कृति और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 14,500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी राज्य की अर्थव्यवस्था में 26 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी प्रकार वर्ष 2000-01 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 15,285 रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की वास्तविक विकास दर 7.23 प्रतिशत अनुमानित है, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (Fiscal Responsibility and Budget Management Act )के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए बेहतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। सरकार ने राजस्व अधिशेष बनाए रखा है और राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत के भीतर रखा है, जो राज्य के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है। बजट में कुल 1,11,703 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 64,989 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 18,153 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय शामिल हैं। वहीं कुल प्राप्तियां लगभग 1,10,143 करोड़ रुपये अनुमानित हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले करों में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 17,415 करोड़ रुपये तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत लगभग 18,491 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट विशेष रूप से गरीब, किसान, युवा और मातृशक्ति को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए 1,327 करोड़ रुपये, अन्नपूर्ति योजना के लिए 1,300 करोड़ रुपये,प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 298 करोड़ रुपये तथा शहरी आवास योजना के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। युवाओं के लिए शिक्षा और खेल के क्षेत्र में 11,871 करोड़ रुपये तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए 586 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि और बागवानी क्षेत्र में 1,113 करोड़ रुपये, जबकि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस वर्ष 19,692 करोड़ रुपये का लिंग आधारित बजट रखा गया है। इसके अंतर्गत सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, ईजा-बोई शगुन योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट और नन्दा गौरा योजना जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए 2,501 करोड़ रुपये, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1,609 करोड़ रुपये तथा लघु सिंचाई के लिए 1,642 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में कई नई योजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें कुंभ मेला की तैयारियों के लिए लगभग 1,027 करोड़ रुपये, साइबर सुरक्षा के लिए 15 करोड़ रुपये, पर्यावरण आधारित पर्यटन आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए 18.5 करोड़ रुपये, आध्यात्मिक आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, ट्राउट मछली पालन, सेब नर्सरी विकास, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना और महक क्रांति योजना जैसी नई पहलें शुरू की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट का मूल मंत्र “संतुलन” है, जिसका अर्थ है समावेशी विकास,आत्मनिर्भरता,नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और पर्यावरण के संतुलन के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट वास्तव में “विकल्प रहित संकल्प से विकसित उत्तराखंड तक की यात्रा का दस्तावेज” है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत नींव बनेगा।

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