शास्त्री निवास में स्वामी इंद्रजीत सिंह का महंत पद पर पट्टाभिषेक, संत समाज ने दी सहमति  ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह शास्त्री की इच्छा अनुसार स्वामी इंद्रजीत सिंह बने उत्तराधिकारी हरिद्वार: संत समाज की उपस्थिति में स्वामी इंद्रजीत सिंह को चादर–तिलक विधि से महंत पद की जिम्मेदारी

शास्त्री निवास में स्वामी इंद्रजीत सिंह का महंत पद पर पट्टाभिषेक, संत समाज ने दी सहमति

ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह शास्त्री की इच्छा अनुसार स्वामी इंद्रजीत सिंह बने उत्तराधिकारी

हरिद्वार: संत समाज की उपस्थिति में स्वामी इंद्रजीत सिंह को चादर–तिलक विधि से महंत पद की जिम्मेदारी

 

 

 

हरिद्वार। शास्त्री निवास के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामीश्री इंद्रजीत सिंह का श्री महंत पद पर पट्टाभिषेक हरिद्वार निर्मला छावनी स्थित प्रसिद्ध श्री शास्त्री निवास आश्रम के श्री महंत हरभजन सिंह शास्त्री जी की श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर निर्मल भेक तथा सड्दर्शन साधु समाज भेक तथा हरिद्वार के अनेकों अखाड़ों आश्रम मठ मंदिरों से आये संत महापुरुषों ने पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ ब्रह्मलीन महंत श्री हरभजन सिंह शास्त्री जी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये तथा उनकी इच्छा तथा अंतिम वसीयत अनुसार उनके उत्तराधिकारी परम सेवा भावी शिष्य स्वामी इंद्रजीत सिंह महाराज को पगड़ी दस्तार भेंट कर तथा चादर उढाकर चादर तिलक विधि सर्व सहमति से संपन्न की इस अवसर पर बोलते हुए निर्मल संतपुरा के महंत प्रातः स्मरणीय परम पूज्य संत जगजीत सिंह महाराज ने कहा एक गुरु अपने जीवन काल में ही अपने योग्य शिष्य का चयन कर अपने द्वारा स्थापित या अपने गुरु द्वारा प्रदत्त मठ मंदिर आश्रम गुरुद्वारा का संरक्षण करते हुए उसे आगे बढ़ाने के लिये संत परंपरा के अनुसार अपने योग्य शिष्य का चयन करता है अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो उनके द्वारा स्थापित धर्मस्थल गलत हाथों में जाने से वह खुर्द बुरद्ध हो सकता है और यह जिम्मेदारी एक ही गुरु के पारायण कर जाने के पश्चात यहां के विद्वत अखाड़ों तथा मठ मंदिर आश्रम गुरुद्वारो के संतों की भी बनती है कि वह एक ऐसे संत का विधिवत रूप से चयन करें जो धर्मस्थल को आगे बढ़ा सके आज सभी संत महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थित के बीच महंत ब्रह्मलीन हरभजन सिंह जी महाराज की इच्छा अनुसार उनके परम सेवा भावी शिष्य स्वामी इंद्रजीत सिंह का विधिवत श्री महंत पद पर पट्टा अभिषेककिया जाता है वह अपने गुरु ब्रह्मलीन श्री हरभजन सिंह शास्त्री जी की तरह तेजवान विद्वान संत हैं वह आश्रम को आगे बढ़ायेंगे महंत इंद्रजीत सिंह शास्त्री ने कहा मे अपने सतगुरु देव ब्रह्मलीन महंत परम पूज्य प्रातः स्मरणीय हरभजन सिंह शास्त्री जी महाराज को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेता हूं तथा उपस्थित अखाड़े आश्रमों तथा मठ मंदिरों से आये सभी संत महापुरुषों के श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं उन्हें सादर वंदन करता हूं तथा मैं उनसे प्रार्थना करता हूं कि अपने आशीर्वाद का हाथ सदैव मेरे सर पर रखें और अपनी छत्रछाया कृपा दृष्टि सदा मुझ पर बनाये रखें तथा मेरे मार्गदर्शक बन कर समय-समय पर मेरा मार्गदर्शन करें निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत श्री जसविंदर सिंह ने कहा महंत श्री हरभजन सिंह शास्त्री जी एक तपस्वी त्याग मूर्ति संत थे हम उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और उनके योग्य शिष्य स्वामी इंद्रजीत सिंह को उनके उत्तराधिकारी के रूप में आश्रम के महंत पद पर चादर तिलक विधि दस्तार पगड़ी प्रदान करते इंद्रजीत सिंह अपने गुरु की तरह शास्त्री निवास के महंत स्वामी के रूप में आश्रम की जिम्मेदारियां का निर्वहन करते रहेंगे इस अवसर पर महंत देवेंद्र सिंह ने कहा स्वामी इंद्रजीत सिंह महंत के रूप में तथा अपने गुरु महंत हरभजन सिंह शास्त्री की तरह आश्रम में आने जाने वाले भक्त जनों की सेवा के साथ-साथ उनका आध्यात्मिक रूप से मार्गदर्शन करते हुए शास्त्री निवास आश्रम के स्वामी महंत के रूप में आश्रम को उन्नति के शिखर पर ले जाने का कार्य करेंगे इस अवसर पर महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज महंत जगजीत सिंह महाराज कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज महंत मोहन सिंह महाराज महंत राघवेंद्र दास महाराज महंत खेम सिंह महाराज सचिव महंत देवेंद्र सिंह महाराज महंत मक्खन सिंह महाराज महंत सुखमल सिंह महाराज महंत लड्डू सिंह महाराज महंत वीर सिंह महाराज महंत गजन सिंह महंत दुर्गादास महाराज महंत ओमप्रकाश शास्त्री महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज संत निहाल सिंह जी महाराज संत कोठारी धर्मपाल सिंह विद्यार्थी अक्षय कुमार आनंद सीखवाल सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे सभी नेआयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया

उत्तराखंड में सीपीएम पार्टी का आठवां राज्य सम्मेलन कर्णप्रयाग में विशाल रैली से शुरू। आमसभा में भाजपा की साम्प्रदायिक , कॉरपोरेट्स ,विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का आह्वान ।

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