मीरपुर मौजपुर में अवैध पेड़ कटान: कार्रवाई के दावे, लेकिन डिप्टी रेंजर की भूमिका पर उठे सवाल

मीरपुर मौजपुर में अवैध पेड़ कटान: कार्रवाई के दावे, लेकिन डिप्टी रेंजर की भूमिका पर उठे सवाल

हरिद्वार। मीरपुर मौजपुर क्षेत्र में आम, बाबुल और तून जैसे बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। सोमवार देर रात बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किए जाने की सूचना सामने आई है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना मिलने पर खानपुर रेंज के हल्का चौकी इंचार्ज डिप्टी रेंजर नवीन अपने सहयोगी मुरसलीन अंसारी के साथ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का दावा किया।

हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने तक कई पेड़ पहले ही काटे जा चुके थे। बताया जा रहा है कि पेड़ ठेकेदार और डिप्टी रेंजर के बीच तीखी बहस जरूर हुई, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि वन विभाग समय रहते सतर्क होता, तो इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई आखिर कैसे संभव हो पाती? सूत्रों की मानें तो जिस पैमाने पर आम, बाबुल और तून के पेड़ काटे गए हैं, वह बिना विभागीय लापरवाही या अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। यही कारण है कि अब इस पूरे प्रकरण में हल्का चौकी खानपुर रेंज नवीन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस मामले में जब खानपुर रेंज के रेंजर मोहन सिंह नेगी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि अवैध रूप से काटे गए सभी पेड़ों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा और पूरे मामले की जांच की जा रही है। हालांकि क्षेत्रीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि केवल जुर्माना लगाकर मामले को दबाने की कोशिश न की जाए, बल्कि यह भी स्पष्ट किया जाए कि अवैध कटान किसकी जानकारी और संरक्षण में हुआ। लोगों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी मीरपुर मौजपुर क्षेत्र से सागवान जैसे कीमती पेड़ों की चोरी का मामला सामने आया था। उस समय वन विभाग की टीम और सुमन नगर चौकी पुलिस ने कलियर स्थित एक आरा मशीन से चोरी की लकड़ी बरामद की थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार, अब तक न तो ठेकेदार के खिलाफ और न ही संबंधित आरा मशीन पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है।अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग इस बार सख्ती दिखाएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा। फिलहाल पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय जनता की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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