हरिद्वार में इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

हरिद्वार में इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

हरिद्वार। हरिद्वार में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट डेवलपमेंट” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है।इस प्रशिक्षण में उत्तराखण्ड के 14 शहरों—देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, उत्तरकाशी, विकासनगर, मुनि की रेती, काशीपुर, हल्द्वानी, रामनगर, टिहरी गढ़वाल, सेलाकुई, कोटद्वार और नैनीताल—से विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। साथ ही हिमाचल प्रदेश से भी प्रतिभागियों ने भागीदारी की, जहां पांवटा साहिब में रिवरफ्रंट विकास कार्य जारी है।उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के उप महानिदेशक ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों का स्वागत किया और उत्तराखण्ड में पर्यावरण अनुकूल रिवरफ्रंट विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने आगामी कुम्भ मेला को ध्यान में रखते हुए इस प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया।कार्यक्रम के दौरान NIUA के टीम लीड लवलेश शर्मा ने राज्य की भौगोलिक विशेषताओं और समृद्ध नदी तंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तराखण्ड में 2000 से अधिक नदियाँ हैं, जिससे इको-सेंसिटिव रिवरफ्रंट विकास की आवश्यकता और बढ़ जाती है।राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तराखण्ड के मॉनिटरिंग विशेषज्ञ रोहित जयाड़ा ने कहा कि हरिद्वार न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव और नदियों के गहरे संबंध का प्रतीक भी है। उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता और अनुभव साझा करने का आह्वान किया।इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, अभियंताओं और विशेषज्ञों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को रिवरफ्रंट विकास के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।यह प्रशिक्षण कल संपन्न होगा और इसके माध्यम से राज्य में पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और सुव्यवस्थित नदी तट विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

error: Content is protected !!