शब-ए-बारात की रात अपने पुरखाें की कब्र पर कुरआन की आयताें की तिलावत कर मगफिरत की करनी चाहिए दुआ : मोहम्मद आरिफ

शब-ए-बारात की रात अपने पुरखाें की कब्र पर कुरआन की आयताें की तिलावत कर मगफिरत की करनी चाहिए दुआ : मोहम्मद आरिफ

 

 

हरिद्वार। मुस्लिम समुदाय का इस्लामिक महीना शाबान अभी चल रहा है। इस महीने का इस्लाम धर्म में काफी महत्व है। यह महीना शुरू हाेते ही मुसलमानाें काे कब्राें व पुरखाें का ख्याल जेहन में आने लगता है। पुरखों काे शवाब पहुंचाने की नीयत से घराें में कुरअनख्वानी, फातिहाख्वानी व मिलाद की जाती है। भूखाें और गरीबाें काे खाना खिलाया जाता है और सदका किया जाता है। इसी महीने की चाँद की 15 तारीख काे मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर जाग कर खुदा की इबादत करते हैं। इस रात जाग कर इबादत करने वाले के गुनाहाें काे खुदा माफ कर देता है। साथ ही इस रात में मुस्लिम समुदाय के लोग अपने पुरखों की कब्राें पर जाते हैं और उनके मगफिरत की खुदा से दुआ करते हैं। शब-ए-बारात की तैयारी काे लेकर कब्रिस्तानाें की साफ सफाई और वहां जाने वाले रास्तों पर रोशनी की व्यवस्था की जाती है। और इस रात मुसलमानाें काे अपने पुरखाें की कब्र पर जाकर कुरआन की आयताें की तिलावत कर मगफिरत की दुआ करनी चाहिए। घराें में नमाज और कुरआन की तिलावत करनी चाहिए।15वीं की रात खुदा बंदाें काे आवाज देते हैं कि काेई गुनाहगार, बीमार व मजलूम जिसे बख्श दूं, शिफा अता करूं व रिज्क दूं। इसलिए बंदाें काे खुदा की इबादत करनी चाहिए। कब्रिस्तान जाते वक्त या कब्राें काे तलाशते वक्त मुसलमानाें काे यह ख्याल रखना चाहिए कि कब्र पर पैर ना पड़े। यह उक्त बातें केंद्रीय निगरानी समिति सोशल जस्टिस भारत सरकार मंत्रालय के हरिद्वार जिला सदस्य व राष्ट्रवादी पसमांदा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच संगठन के जिलाध्यक्ष मोहम्मद आरिफ ने प्रेस के समक्ष साझा किए हैं।

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