गढ़मीरपुर में मुहर्रम पर उमड़ा अकीदत का सैलाब, “या अली” और “या हुसैन” के नारों से गूंजा माहौल,

गढ़मीरपुर में मुहर्रम पर उमड़ा अकीदत का सैलाब, “या अली” और “या हुसैन” के नारों से गूंजा माहौल, ताजिया को कर्बला कर्बला में ले जाकर  किए गए सपोर्ट दे खाक

 

हरिद्वार/गढ़मीरपुर। मुहर्रम के अवसर पर गढ़मीरपुर में हज़रत इमाम हुसैन की याद में पारंपरिक ताज़िया जुलूस पूरे धार्मिक श्रद्धा और अनुशासन के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे रास्ते “नारा-ए-हैदरी… या अली”, “हक़ हुसैन… या हुसैन” के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा। लोगों ने कर्बला के शहीदों को ख़िराज-ए-अकीदत पेश करते हुए उनकी कुर्बानी को याद किया। इसी बीच जगह-जगह लंगर तकसीम किए गए और अब्बासी महासभा ने भी लंगर तकसीम किया अखाड़े के सदर राव मौजम अली ने बताया कि गांव में ताज़ियादारी की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मुहर्रम केवल मातम का पर्व नहीं, बल्कि सच्चाई, इंसाफ, सब्र और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है। हर वर्ष पूरे गांव के लोग मिलकर इस परंपरा को निभाते हैं।अखाड़ा उस्ताद इंतज़ार अली ने बताया कि जुलूस के दौरान अखाड़े के खिलाड़ियों ने गड़गा, मूंगरी और अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों के करतबों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।मियां गुलाम साबिर ने कहा कि कर्बला की धरती पर हज़रत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय शहादत को स्वीकार किया। उनकी कुर्बानी पूरी इंसानियत के लिए एक मिसाल है, जो हमें हर हाल में सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निर्धारित मार्गों से होता हुआ कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताज़ियों को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही और स्थानीय लोगों ने भी आपसी भाईचारे के साथ आयोजन को सफल बनाया। इसमें शामिल राव मौजम अली सदर, मियां ग़ुलाम साबिर, (अखाड़े के उस्ताद इंतजार अली, दिलदार अब्बासी, वसीम अब्बासी, मेहताब अब्बासी,तजमुल खां ) अली नवाज खां, राव शहीद, नसीम अब्बासी,राव अखलाक, हसनैन अली, अय्या कुरैशी, तौफीक अंसारी, सलमान अली, आमिर खान, राशिद अली, गुलजार अली, मुजीब खां, राव आबाद, फैजान अली, आफताब अली, शोएब अब्बासी, डॉक्टर नफीस, सलीम अली, आदि मौजूद रहे।

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