प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल? पात्र गरीबों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ देने के आरोप, जिला अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी से उच्च स्तरीय जांच की मांग गढ़मीरपुर में आवास योजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, समाजसेवी राव सुहैल ने सौंपा शिकायती पत्र; नसीम उर्फ सीमा ने सुनाई दर्दभरी दास्तान

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल? पात्र गरीबों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ देने के आरोप, जिला अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी से उच्च स्तरीय जांच की मांग

गढ़मीरपुर में आवास योजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, समाजसेवी राव सुहैल ने सौंपा शिकायती पत्र; नसीम उर्फ सीमा ने सुनाई दर्दभरी दास्तान

 

हरिद्वार। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य देश के प्रत्येक गरीब, बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी व्यक्ति कच्चे या जर्जर मकान में रहने को मजबूर न रहे। लेकिन हरिद्वार जनपद के बहादराबाद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गढ़मीरपुर में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और समाजसेवी राव सुहैल ने योजना में कथित अनियमितताओं, पक्षपात और अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।समाजसेवी राव सुहैल ने जिला अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान एवं ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) की कथित मिलीभगत से प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं। उनका कहना है कि जिन परिवारों को वास्तव में योजना का लाभ मिलना चाहिए था, उनके नाम सूची से हटा दिए गए, जबकि आर्थिक रूप से सक्षम और पहले से पक्के मकानों में रहने वाले लोगों को लाभार्थी बना दिया गया।राव सुहैल का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के जीवन में बदलाव लाने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में यदि पात्र परिवारों का अधिकार छीनकर अपात्र लोगों को लाभ दिया जाता है, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की मंशा के साथ अन्याय है, बल्कि उन गरीब परिवारों के साथ भी अन्याय है जो वर्षों से एक पक्के मकान का सपना देख रहे हैं।इसी बीच गांव की रहने वाली नसीम उर्फ सीमा भी अपनी पीड़ा लेकर सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बरसात में उनका कच्चा मकान पूरी तरह गिर गया था, जिसके बाद वह बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।नसीम उर्फ सीमा ने बताया कि जब ग्राम सभा की खुली बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की सूची पढ़ी गई तो उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि वह पिछले लगभग एक वर्ष से गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। बीमारी के कारण उनका एक हाथ भी ठीक से काम नहीं करता, जिससे वह मजदूरी या कोई अन्य काम करने में असमर्थ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना ही उनके लिए एकमात्र उम्मीद थी, लेकिन उन्हें उससे भी वंचित कर दिया गया।नसीम उर्फ सीमा ने आरोप लगाया कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की गई। उनका कहना है कि गरीब होने के कारण वह किसी प्रकार की राशि देने में सक्षम नहीं थीं और इसी वजह से उनका नाम लाभार्थी सूची से हटा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच होना अभी बाकी है।ग्रामीणों का कहना है कि गढ़मीरपुर में आज भी कई गरीब परिवार झोपड़ियों और जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में उनके घरों में पानी भर जाता है और हर समय हादसे का डर बना रहता है। इसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि आरोप है कि कई ऐसे लोगों को योजना का लाभ दे दिया गया है जिनके पास पहले से पक्के मकान और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।राव सुहैल ने जिला अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाकर वास्तविक पात्र गरीब परिवारों को योजना का लाभ दिया जाए।उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों के लिए बनाई जाती हैं। यदि इन योजनाओं में भ्रष्टाचार, पक्षपात या धनबल का प्रभाव देखने को मिलता है तो सबसे अधिक नुकसान गरीब और असहाय परिवारों को उठाना पड़ता है। इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे।अब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। पूरे गांव सहित क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रधानमंत्री आवास योजना की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होंगे और संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में गरीबों का हक उन्हें मिलेगा? क्या अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाकर पात्र परिवारों को न्याय मिलेगा? या फिर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप इसी तरह गरीबों के सपनों को कुचलते रहेंगे? इसका जवाब अब जिला प्रशासन की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा।

कलेक्टर भवन में स्थापित वी.सी. कक्ष में मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में वर्चुअल्स मीटिंग द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के सभी जिलाधिकारियों से संवाद स्थापित किया। जिसमें प्रदेश में शीतलहर से बचाव के लिए सभी प्रभावी उपाय किये जाने आवश्यक दिशा निर्देश दिए।।

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