मासूमों के लिए जानलेवा बना नाला, खेलते समय दो बच्चियां गिरीं
छह वर्षीय बच्ची तेज बहाव में बही, दूसरी बच्ची को लोगों ने बचाया; पुलिया पर सुरक्षा जाल नहीं होने से उठे गंभीर सवाल
हरिद्वार। सिडकुल थाना क्षेत्र के ग्राम रावली महदूद में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा सामने आया। पुलिया पर खेल रही दो बच्चियां अचानक नाले में गिर गईं। नाले में पानी का बहाव तेज होने के कारण छह वर्षीय बच्ची बह गई, जबकि सात वर्षीय बच्ची को आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और परिजन बच्ची की तलाश को लेकर बेहद चिंतित हैं।हादसे के बाद नाले और पुलिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुलिया के आसपास बच्चे और स्थानीय लोग आवाजाही करते हैं, वहां सुरक्षा जाल या पर्याप्त लोहे की ग्रिल तक नहीं लगी है। ऐसे में नाले का तेज बहाव कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।स्थानीय निवासियों के अनुसार नाले में लंबे समय से गंदगी जमा होने और आसपास अतिक्रमण की स्थिति के कारण पानी की निकासी भी प्रभावित होती है। लोगों का कहना है कि यदि नाले की समय पर सफाई होती, पानी की निकासी सुचारु रहती और पुलिया पर सुरक्षा जाल लगा होता तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।
अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, फिर नाले पर कार्रवाई कब?
प्रदेश में अतिक्रमण के खिलाफ शासन स्तर से सख्त कार्रवाई की बात लगातार कही जा रही है। मुख्यमंत्री द्वारा भी अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि रावली महदूद में नाले के आसपास अतिक्रमण की स्थिति है, तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई कब की जाएगी?लोगों का कहना है कि नाले पर या उसके आसपास किया गया अतिक्रमण केवल जमीन से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे पानी की निकासी और लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वच्छता अभियान पर भी उठे सवाल
देशभर में स्वच्छता को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन रावली महदूद के नाले की तस्वीर जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है। नाले में जमा गंदगी और कचरे को देखकर स्थानीय लोग भी नाराज हैं।स्थानीय निवासियों का कहना है कि काश नाले की समय पर सफाई हो जाती, अतिक्रमण हट जाता और पुलिया पर सुरक्षा जाल लगा होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था। लोगों ने प्रशासन से नाले की नियमित सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।मौके पर पहुंचे हाजी तौफीक अहमद घटना की जानकारी मिलने पर आजाद समाज पार्टी के रानीपुर विधानसभा क्षेत्र के भावी उम्मीदवार हाजी तौफीक अहमद मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में नालों की सफाई, जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।हाजी तौफीक अहमद ने कहा कि यदि नाले के आसपास पहले से सुरक्षा के इंतजाम होते और पुलिया पर मजबूत जाल या ग्रिल लगी होती तो बच्चों के लिए खतरा कम किया जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से नाले की तत्काल सफाई, अतिक्रमण की जांच, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा पुलिया पर मजबूत सुरक्षा जाल और बैरिकेडिंग लगाने की मांग की। वहीं भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि नाले और पुलिया के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में ऐसे सभी स्थानों को चिन्हित किया जाए, जहां खुले नाले, पुलिया या गंदगी के कारण हादसे का खतरा बना हुआ है।उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद व्यवस्था करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही ऐसे खतरनाक स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए, ताकि किसी मासूम की जिंदगी खतरे में न पड़े।
पिता गौतम का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे के बाद बच्ची के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्ची के पिता गौतम का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार लगातार अपनी मासूम बच्ची की तलाश को लेकर परेशान है। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार परिवार की स्थिति बेहद भावुक और चिंताजनक बनी हुई है।यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। आखिर जब नाला खुला है, पानी का बहाव तेज है और पुलिया पर सुरक्षा जाल तक नहीं है, तो जिम्मेदार विभाग किसी हादसे का इंतजार क्यों करे?अब स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण करे, नाले की सफाई कराए, अतिक्रमण की स्थिति की जांच करे और पुलिया पर मजबूत सुरक्षा जाल व बैरिकेडिंग लगाए।स्थानीय लोगों का कहना है—अब कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले होनी चाहिए, ताकि किसी और परिवार को अपनी मासूम संतान के लिए इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।





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