सावन के प्रथम सोमवार पर शिवमय हुआ हरिद्वार, शिवालयों में उमड़ा आस्था का महासैलाब, “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी धर्मनगरी

सावन के प्रथम सोमवार पर शिवमय हुआ हरिद्वार, शिवालयों में उमड़ा आस्था का महासैलाब, “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी धर्मनगरी

हरिद्वार। देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र सावन माह के प्रथम सोमवार पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय हो उठी। आधी रात के बाद से ही हरिद्वार की सड़कों, घाटों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। सुबह होते-होते हर की पैड़ी, कनखल स्थित दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर, बिल्वकेश्वर महादेव, कोटीश्वर महादेव, नीलेश्वर महादेव, दक्षिण काली मंदिर परिसर सहित शहर और आसपास के सभी प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “जय भोलेनाथ” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।सावन के पहले सोमवार का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण रहा कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार और देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। श्रद्धालुओं ने सबसे पहले हर की पैड़ी पर मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और उसके बाद गंगाजल लेकर भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक किया।हर की पैड़ी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। घाटों पर गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद, दूध, दही, चंदन और पुष्प लेकर मंदिरों की ओर बढ़ते नजर आए। मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, शिव चालीसा पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। घंटियों और शंखनाद की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।कांवड़ यात्रा के चलते धर्मनगरी की रौनक देखते ही बन रही थी। भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़िए “बोल बम” के जयघोष के साथ शिवभक्ति में लीन दिखाई दिए। विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त अपने-अपने समूहों के साथ भगवान शिव का गुणगान करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई कांवड़िए डाक कांवड़ के रूप में तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए, जबकि सामान्य कांवड़िए पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ यात्रा कर रहे थे।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। मंदिरों, घाटों, प्रमुख चौराहों और कांवड़ मार्गों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल, पीएसी, अर्धसैनिक बल और यातायात पुलिस तैनात रही। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई। नियंत्रण कक्ष से पूरे मेले और यातायात व्यवस्था पर नजर रखी गई ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया। भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया तथा विभिन्न मार्गों पर वाहनों का डायवर्जन किया गया। पुलिस कर्मी लगातार श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग से आगे बढ़ने की अपील करते रहे। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई और मंदिर परिसरों में प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए। इन शिविरों में शीतल पेयजल, भोजन, फल, चिकित्सा सहायता, प्राथमिक उपचार, विश्राम की व्यवस्था और खोया-पाया केंद्र संचालित किए गए। स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा के साथ श्रद्धालुओं की सेवा की, जिससे आने वाले भक्तों को काफी राहत मिली।हरिद्वार के बाजारों में भी सावन के पहले सोमवार का विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूजा सामग्री, बेलपत्र, रुद्राक्ष, शिवलिंग, गंगाजल पात्र, प्रसाद और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। होटल, धर्मशालाएं और आश्रम श्रद्धालुओं से भरे रहे, जिससे पूरे शहर में धार्मिक पर्यटन का माहौल देखने को मिला।महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, अच्छे स्वास्थ्य और विश्व शांति की कामना करते हुए विशेष पूजा-अर्चना कराई। मंदिरों में पूरे दिन रुद्राभिषेक और विशेष अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा।सावन का पहला सोमवार केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बनकर सामने आया। जगह-जगह भंडारों में श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया। स्वयंसेवकों ने कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सेवा को भगवान शिव की सेवा मानते हुए पूरे उत्साह के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।दिनभर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिरों में दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से गूंजती धर्मनगरी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सावन का महीना केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है।

बारिश के कारण धनौरी में तिरछे पुल ,मुख्य पटरी पर पानी का जमाव होने के कारण कांवड़ियों को काफी दिक्कत मार्गस गुजरना पड़ रहा था , धनौरी चौकी प्रभारी पुष्कर सिंह चौहान तत्काल मौके पर पहुचकर पुल की सफाई कर पानी की निकासी को सुचारू

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