🌙 माहे रमजान मुबारक 🌙
माहे रमजान का मुक़द्दस चांद नज़र आ गया है और रहमतों-बरकतों का पवित्र महीना हम सब पर साया-फगन हो चुका है।
मौहम्मद शमीम अहमद अब्बासी ने कहा है कि माहे रमजान रहमतों, बरकतों और मग़फ़िरत का महीना है। यह पवित्र महीना हमें सब्र, परहेज़गारी और इंसानियत की राह पर चलने की सीख देता है। रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपने दिल, ज़ुबान और किरदार को पाक करने का जरिया है। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान हर मुसलमान को नमाज़ की पाबंदी, कुरआन की तिलावत, ज़कात और सदक़ा के जरिए जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और समाज में भाईचारा, मोहब्बत व आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना चाहिए। गरीबों, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों का ख्याल रखना ही रमजान की असली रूह है। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि इस मुक़द्दस महीने में नफ़रत को छोड़कर अमन, एकता और इंसानियत का पैग़ाम फैलाएं और एक-दूसरे की मदद करें।
अल्लाह तआला हम सबकी रोज़े, नमाज़ और दुआओं को कबूल फरमाए।
आप सभी को दिल की गहराइयों से माहे रमजान मुबारक। 🤲






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